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श्रीमद्भागवतम् प्रथम स्कन्ध (Srimad Bhagavatam Pratham Skandha)
Author: कृष्णकृपामूर्ती श्री श्रीमद् ए. सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद
Description
श्रीमद्भागवतम् भारत के समस्त वाङ्मय में श्रीमद्भागवतम् को एक दार्शनिक तथा साहित्यिक महाकाव्य का प्रमुख स्थान प्राप्त है। भारत का कालातीत ज्ञान प्राचीन संस्कृत ग्रन्थ वेदों में अभिव्यक्त हुआ है, जो मानव ज्ञान के समस्त क्षेत्रों का संस्पर्श करता है। प्रारम्भ में वेदों की मौखिक परम्परा थी, जिन्हें “ईश्वर के साहित्यिक अवतार” श्रील व्यासदेव ने लिखित रूप प्रदान किया। वेदों का संग्रह कर लेने के बाद श्रील व्यासदेव ने अपने गुरु की प्रेरणा से वेदों के सार को श्रीमद्भागवतम् के रूप में प्रस्तुत किया। श्रीमद्भागवतम् “वैदिक साहित्य रूपी वृक्ष का परिपक्व फल” कहा जाता है और यह बौद्धिक ज्ञान का अत्यन्त पूर्ण तथा प्रामाणिक भाष्य है।
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