Maintenance Notice : To improve your experience, our website will undergo maintenance for 10 Hours on 18th Feb 2026 from 10:00 AM to 08:00 PM IST.
योग की पूर्णता (Yoga ki Purnata)
Author: कृष्णकृपामूर्ती श्री श्रीमद् ए. सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद
Description
योग का पूर्ण अभ्यास करने का अर्थ क्या है? क्या यह करना आज सम्भव है? चलिए इस बात का पता लगाते हैं। विश्वविख्यात योगगुरु श्रील प्रभुपाद, योग के सही अर्थ को ढकने वाले व्यापारीकरण का पर्दाफाश करते हैं। वे यह सिखाते हैं कि, प्राचीन योगपद्धति केवल आसन और कसरतों के, तथा ध्यान व श्वासोच्छ्वास की तकनीकों के भी परे है और इसका लक्ष्य पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण के साथ प्रेममय शाश्वत मिलन है।
Sample Audio
Copyright © 1972, 2022 BHAKTIVEDANTA BOOK TRUST (E 5032)
Your IP Address: 216.73.216.180
Server IP Address: 169.254.130.4